भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने भारतीय महासागर में तीन दिवसीय संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत की है। इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और समुद्री लूट (पायरेटिंग) सहित गैर‑पारंपरिक समुद्री खतरों का सामना करना है ।
🚢 अभ्यास में भाग लेने वाले जहाज़ और एयर प्लेटफ़ॉर्म
इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के जहाज़ों के साथ-साथ Operation ATALANTA के दो EUNAVFOR फ्रिगेट जहाज़ भी शामिल हैं:
- ITS Antonio Marceglia (इटली)
- ESPS Reina Sofía (स्पेन)
इनके साथ उनके एयर ग्रुप भी परिचालित रहेंगे ।
🎯 अभ्यास के मुख्य उद्देश्य
- उन्नत पायरेटिंग-कॉपिंग संचालन (counter-piracy ops)
- संचालन की आपसी संगतता (interoperability) हेतु अभ्यास
- तकनीकी युद्धाभ्यास (tactical manoeuvres) की तैयारी
- दमदार संचार प्रोटोकॉल (communication protocols) की कार्यान्वितिकरण रणनीतियाँ ।
इन सभी गतिविधियों को दोनों पक्षों के Maritime Operations Centres (MOCs) द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।
🔍 प्रस्तावना व रणनीतिक पृष्ठभूमि
- यह अभ्यास EU-India द्विपक्षीय सहयोग का एक हिस्सा है, जो फरवरी 2025 में EU आयोग के भारत दौरे से प्रेरित है।
- मार्च 2025 में आयोजित 4th India‑EU Maritime Security Dialogue ने समुद्री अवैध गतिविधियों के खिलाफ साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।
- अप्रैल में EUNAVFOR ऑपरेशन कमांडर Vice Admiral Ignacio Villanueva Serrano का भारत दौरा दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और गहरा बनाने में अहम रहा ।
🛳️ मुंबई में पहले चरण की तैयारियाँ
- EU के फ्रिगेट जहाज़ ESPS Reina Sofía और ITS Antonio Marceglia 26 मई से 1 जून तक मुंबई में डॉकिंग में थे।
- इस दौरान दोनों नौसेनाओं ने SMEE (Subject Matter Expert Exchanges) और TTX (Table Top Exercises) आयोजित किए ताकि समुद्र पर वास्तविक चुनौतियों में बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।
- यह पहली बार था जब EU की नौसेना (ATALANTA) भारत में औपचारिक रूप से शामिल हुई ।
🌍 महत्त्व और रणनीतिक दृष्टिकोण
- यह अभ्यास हिन्द महासागर क्षेत्र में मुक्त, खुली एवं नियम आधारित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- दोनों पक्ष संयुक्त रूप से नैतिक समुद्री व्यापार, विकासशील जलयात्रा रूट्स, संप्रभुता का सम्मान और संयुक्त आतंक एवं तस्करी के खिलाफ प्रतिबद्धता पर कार्य कर रहे हैं ।
- Operation Atalanta की 2008 से चल रही मिशन शाखा है, जिसमें पायरेटिंग, हथियार तस्करी, अवैध एवं रिपोर्ट न की गई मछली पकड़ना (IUU fishing) जैसी चुनौतियाँ शामिल हैं ।
🧭 निष्कर्ष
- 1–3 जून 2025 तक चली इस तीन-दिवसीय अभ्यास ने भारत‑EU साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
- अभ्यास ने उन्हें दोनों नौसेनाओं के बीच संचालन क्षमता, समन्वय, और संवाद प्रोटोकॉल की दक्षता और बेहतर तालमेल पर काम करने का अवसर दिया।
- यह अभ्यास भारतीय महासागर क्षेत्र में सामरिक स्थिरता और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

