प्रमुख प्रक्रिया: जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव

प्रमुख प्रक्रिया: जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव


  • रात नई दिल्ली स्थित जनपथ स्थित सरकारी आवास में आग लगी। उसमें फायर ब्रिगेड की टीम को स्टोररूम में जले‑आधे जले ₹500 के नोट्स के गड्ढे दिखाई दिए, जिनकी ऊँचाई अनुमानित रूप से डेढ़ फीट थी .
  • सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि यह स्टोररूम केवल जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के नियंत्रण में था, लेकिन उन्होंने नकद के स्रोत का कोई उपयुक्त उत्तर नहीं दिया .

⚖️ आंतरिक जांच और सिफारिश

  • तब के CJI संजिव खन्ना ने तुरंत 22 मार्च को एक इ‑हाउस जांच समिति गठित की। 10 दिनों में समिति ने 55 गवाहों को सुनकर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जिसमें उन्हें दोषी करार देते हुए महाभियोग सिफारिश की गई .
  • रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन CJI ने राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री को वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की सलाह दी .

🏛️ संसद में प्रक्रिया की तैयारी

  • मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाना तय माना गया था। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि 100 से अधिक सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जो आवश्यक संख्या से अधिक है .
  • कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों को इस प्रस्ताव में शामिल होने का निर्देश दिया गया। सांसदों ने विधिवत लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन भी सौंपा है .

🗳️ कौन कहाँ शुरू करेगा प्रक्रिया?

  • आरंभ में मामला राज्यसभा में एक प्रस्ताव के रूप में सबमिट हुआ, जिसे पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वीकार किया था। लेकिन यह प्रस्ताव फॉर्मल रूप से अनुमोदित नहीं हुआ और इसमें कानूनी खामियाँ मिलीं, जिसके चलते इसे बाद में रद्द कर दिया गया .
  • सरकार ने स्पष्ट किया कि अब महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में ही आगे बढ़ेगा, जिसमें सभी पक्षों की सहमति लीजिए जाने पर राज्यसभा भी उसके लिए सहमत हो सकती है .

⚖️ महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया

  • संविधान की धारा 124(4) एवं 124(5) के तहत यह प्रक्रिया लचीली लेकिन संवैधानिक रूप से कठोर है:
    1. प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों की सहमति और राज्यसभा में 50 सांसदों की आवश्यकता होती है।
    2. स्वीकृति मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा अध्यक्ष तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करते हैं, जिसमें एक CJI या SC जज, एक हाई कोर्ट जज और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं .

✍️ जस्टिस वर्मा का बचाव

  • वर्मा ने जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें उचित सुनवाई का मौका नहीं मिला और उपायुक्त ने सबूतों के आधार पर पूर्वाग्रहपूर्ण निर्णय लिए गए .
  • उन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए केवल “XXX” नाम से याचिका दाखिल की, यह दर्शाता है कि केस कितना संवेदनशील और विवादास्पद बन चुका है .

📅 निष्कर्ष और आगे की राह

  • 28 मई 2025 तक सरकार महाभियोग प्रस्ताव लाने की समूहबद्ध तैयारी में जुटी थी और प्रक्रिया की रूपरेखा स्पष्ट थी।
  • अब यह देखना होगा कि लोकसभा अध्यक्ष प्रस्ताव को कब दलों के बीच अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करते हैं, और संसद की कार्यवाही इस दिशा में कैसे आगे बढ़ती है।