तिथि: 7 मई 2025 (बुधवार) – प्रारंभ: रात 10:19 बजे
पारण (व्रत खोलने का समय): 8 मई 2025 को दोपहर 12:29 बजे तक
व्रती: विशेषकर विष्णु भक्त, सनातनी गृहस्थ, संन्यासी एवं महिला उपासक वर्ग
🕉️ व्रत का महत्व
मोहिनी एकादशी वर्ष की उन एकादशियों में से एक है, जिसे भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के स्मरण में रखा जाता है। यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आता है और इसका उल्लेख पद्म पुराण, विष्णु धर्मसूत्र व स्कंद पुराण में विस्तार से किया गया है।
यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है बल्कि मानसिक शुद्धि, वैराग्य भाव, एवं मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है। विशेषतः यह व्रत काम, क्रोध, लोभ जैसी आंतरिक दुर्बलताओं को पराजित करने हेतु श्रेष्ठ माना गया है।
📖 पौराणिक कथा
समुद्र मंथन के समय जब देवों और दैत्यों में अमृत पान के लिए युद्ध हुआ, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिला दिया और दैत्यों को वंचित कर दिया।
इस मोहिनी स्वरूप में भगवान ने माया और विवेक का प्रतीक बनकर दर्शाया कि विवेकशीलता के साथ माया का सही प्रयोग ही धर्म और जीवन की रक्षा कर सकता है।
🌿 व्रत विधि
🔸 एकादशी की पूर्व संध्या (7 मई)
- संकल्प लें कि आप पूरी एकादशी व्रत रहेंगे।
- रात्रि को सात्विक भोजन करें; तामसिक पदार्थों से परहेज़ करें।
🔸 एकादशी (7 मई रात 10:19 से शुरू)
- सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर पीत वस्त्र पहनाएँ।
- तुलसी पत्र, केले, पंचामृत, चंदन, धूप, दीप और फल अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम, गीता का 10वां अध्याय, अथवा नारायण स्तोत्र का पाठ करें।
🔸 रात्रि जागरण
- भजन-कीर्तन, सत्संग या विष्णु स्तुति करें। मोहिनी अवतार की कथा सुनें या सुनाएँ।
🔸 पारण (व्रत समाप्ति) – 8 मई दोपहर 12:29 बजे तक
- द्वादशी को विधिपूर्वक तुलसी के पत्ते और जल अर्पण कर व्रत का पारण करें।
- ब्राह्मण या भूखे को भोजन कराना पुण्यदायक होता है।
✨ ज्योतिष और आध्यात्मिक फल
- यह एकादशी शुभ योग में आ रही है – सिद्धि योग + पुष्य नक्षत्र ( جزवीक स्रोतों के अनुसार)।
- मानसिक शांति, धनवृद्धि, परिवारिक क्लेशों से मुक्ति, वैवाहिक जीवन में माधुर्य और ब्रह्मज्ञान की प्रेरणा—ये सभी इस व्रत के आध्यात्मिक लाभ माने गए हैं।
🌍 भारत और विश्व में आयोजन
- हरिद्वार, वृंदावन, उज्जैन जैसे तीर्थों में रात्रि जागरण और विष्णु सहस्त्रनाम संकीर्तन का आयोजन हुआ।
- दक्षिण भारत के विष्णु मंदिरों (त्रिची, श्रीरंगम) में विशेष अभिषेक और अन्नदान हुआ।
- विदेशों (अमेरिका, मॉरीशस, फिजी) में प्रवासी भारतीयों ने ऑनलाइन सत्संग और कथा श्रवण किया।
🌟 निष्कर्ष
मोहिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि माया और विवेक, भक्ति और आत्मनियंत्रण का सुंदर समन्वय है।
जो श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका पालन करता है, वह सांसारिक भ्रमों से ऊपर उठकर सत्य, शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।

