मानसून 2025: शुरुआती रफ्तार के बाद ठहराव, अब 11 जून से फिर गति की उम्मीद

मानसून 2025: शुरुआती रफ्तार के बाद ठहराव, अब 11 जून से फिर गति की उम्मीद


इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उम्मीद से पहले दस्तक दी थी, जिससे किसानों और नागरिकों को समय से वर्षा की आशा बंधी थी। हालांकि, शुरुआती उत्साह के बाद मानसून की प्रगति फिलहाल ठहर गई है। अब भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून 11 जून 2025 से दोबारा सक्रिय होने की संभावना है।


🌧️ मानसून का आगमन: समय से पहले पर रफ्तार धीमी

मानसून ने इस वर्ष 26 मई को केरल में दस्तक दी, जो सामान्य तिथि से लगभग 8 दिन पहले था। इससे संकेत मिला था कि इस बार बारिश समय पर या उससे पहले देश के अन्य हिस्सों में भी पहुँचेगी। लेकिन इसके बाद अचानक इसकी गति धीमी पड़ गई।

फिलहाल मानसून केवल केरल, तटीय कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के कुछ भागों और पूर्वोत्तर राज्यों तक ही सीमित है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य भारत और उत्तर भारत में अब भी मानसून का इंतजार है।


🛰️ IMD की रिपोर्ट: 11 जून से फिर तेज़ी

भारतीय मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में हवा के दबाव की स्थितियाँ इस समय मानसून के अनुकूल नहीं हैं। हालांकि 10 जून के बाद, निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे मानसून को फिर से गति मिलेगी।

“मानसून 11 जून से फिर सक्रिय हो सकता है। उत्तर और मध्य भारत में बारिश की शुरुआत तब होगी,” – डॉ. मृत्युंजय महापात्र, महानिदेशक, IMD।


🚜 कृषि क्षेत्र पर प्रभाव

मानसून की रफ्तार थमने से सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा है। बीज बोने की प्रक्रिया रुक गई है और खेतों में तैयारी अधूरी पड़ी है। खासकर महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसान चिंतित हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 11-15 जून के बीच मानसून दोबारा सक्रिय हो जाता है, तो खरीफ की फसलें समय पर बोई जा सकती हैं। लेकिन देरी होने पर उत्पादन पर असर पड़ सकता है।


⚠️ कहां हो रही है भारी बारिश

फिलहाल भारी वर्षा इन क्षेत्रों में जारी है:

  • केरल – कोझीकोड, तिरुवनंतपुरम और इडुक्की जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति
  • पूर्वोत्तर भारत – असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश, नदी जलस्तर बढ़ा
  • आंध्र प्रदेश – विशाखापत्तनम और श्रीकाकुलम जिलों में बारिश ने राहत दी

📊 मानसून 2025 अनुमान: सामान्य बारिश की संभावना

भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार देश में सामान्य (96-104%) वर्षा हो सकती है। लेकिन इसकी शुरुआत में अस्थिरता बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह एल-नीनो प्रभाव का भी नतीजा हो सकता है, जो मानसून को प्रभावित करता है।


📌 निष्कर्ष

मानसून 2025 की शुरुआत समय से पहले हुई थी, लेकिन इसकी प्रगति में ठहराव चिंता का विषय बन गई है। हालांकि मौसम विभाग की भविष्यवाणी उम्मीद देती है कि 11 जून से मानसून फिर से सक्रिय होकर मध्य और उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा, जिससे गर्मी से राहत और कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी।