केंद्र सरकार ने NCERT को NCERT डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देकर शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। यह फैसला UGC की सिफारिश पर लिया गया। अब NCERT केवल स्कूलों के लिए किताबें बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उच्च शिक्षा में भी अपनी भूमिका निभाएगा।
NCERT डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद संस्था को कई नए अधिकार मिल गए हैं। अब NCERT अपने स्तर पर कोर्स डिजाइन कर सकता है। साथ ही, वह खुद एडमिशन प्रक्रिया तय करेगा और परीक्षाएं भी आयोजित करेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अब NCERT छात्रों को डिग्री देने में सक्षम होगा।
इस बदलाव से देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद है। खासतौर पर शिक्षक प्रशिक्षण और रिसर्च के क्षेत्र में नए अवसर बनेंगे। NCERT के तहत आने वाले रीजनल इंस्टीट्यूट्स भी इस नई व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने से शिक्षा प्रणाली में लचीलापन आएगा और छात्रों को आधुनिक व उपयोगी कोर्स मिल सकेंगे। यह फैसला आने वाले समय में शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. NCERT डीम्ड यूनिवर्सिटी का क्या मतलब है?
यह दर्जा मिलने के बाद NCERT खुद कोर्स, एडमिशन और परीक्षा तय कर सकता है और डिग्री दे सकता है।
Q2. क्या इससे छात्रों को फायदा होगा?
हाँ, छात्रों को नए कोर्स और बेहतर शिक्षा विकल्प मिलेंगे।
Q3. NCERT पहले क्या करता था?
NCERT स्कूल पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करता था और शिक्षकों को ट्रेनिंग देता था।

