नई दिल्ली/श्रीनगर, 26 अप्रैल 2025 – जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भयावह आतंकवादी हमले की जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई है। गृह मंत्रालय ने इस संवेदनशील रैंक घेरे मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी को आगे की स्पष्ट और निष्पक्ष जांच के लिए अधिकृत किया है।
🕵️♂️ आदेश एवं जांच की शुरुआत
- मंत्रालय ने आतंकी साजिश की “अत्यधिक गंभीरता” को देखते हुए एनआईए को आदेश जारी किया। स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट और मुआवजा कार्यवाही के बाद, अब एजेंसी मामले की गहनता से जांच करेगी ।
- इसके तहत, केंद्रीय एजेंसी ने फोरेंसिक सबूत, मोबाइल डेटा, वीडियो फुटेज, और बायोमेट्रिक जानकारी लिए बड़े पैमाने पर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए।
👥 आरोपी गिरफ्तार, रिमांड में लिए गए
- दो स्थानीय कश्मीरी—परवेज अहमद जोठर और बशीर अहमद जोठर—को आरोपियों के लिए सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इन्हें 23 जून को कोर्ट ने पाँच दिन के रिमांड पर भेजा ।
- इनके निशानदेही पर तीन पाकिस्तानी मूल के लश्कर‑ए‑तैयबा (LeT) के आतंकी भी पहचाने गए, जिनमें से एक पूर्व SSG कमांडो था ।
🔍 एनआईए की कार्ययोजना
- मामले की तह तक पहुँचने के लिए आरोपियों से गहन पूछताछ।
- वीडियो और मोबाइल फुटेज की सहायत से ट्रैवल रूट, आश्रय स्थान और साजिश के तार पीछे तक खींचने की कोशिश।
- जमीन पर नजदीकी निगरानी—स्थानीय गवाहों से बातचीत, थोक जांच और फोरेंसिक ढांचे की तैयारी।
- जनता से फोटोज़ और वीडियो की अपील भी जारी की गयी है, ताकि जांच में संदेहास्पद संदर्भ स्पष्ट हो सकें ।
❗ बड़ी साजिश का संकेत
- जांच शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि पहलगाम में यह हमला एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें विदेशी आतंकी संगठनों और स्थानीय सहयोगियों की मिलीभगत हुई है ।
- पाकिस्तान-आधारित TRF तथा LeT से जुड़े तार इस हमले के पीछे बैठे रणनीतिक तहतमेहजाख़ को उजागर करने की ओर इशारा करते हैं।
🗣️ प्रमुख बयान
- श्री फारूक अबदुल्ला: “अगर सही लोगों को पकड़ा गया है, तो हम जान पाएंगे कि हमला किसने किया”
⚖️ आगे की कार्रवाई और रणनीति
- एनआईए का रिमांड अवधि का उपयोग जाकर विस्तृत पूछताछ, छापे, नए साक्ष्यों की तलाश में किया जाएगा।
- स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के बीच सुचारू समन्वय से सबूतों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
- दोषियों को सुरक्षित न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा।
🎯 निष्कर्ष
गृह मंत्रालय द्वारा एनआईए को यह जिम्मेदारी सौंपना एक स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस हमले की जांच में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। स्थानीय और विदेशी मददगारों की गिरफ्तारी की दिशा में हो रही प्रगति सकारात्मक है। अगला प्रमुख कदम—रिमांड में पूछताछ और ठोस सबूतों के आधार पर आरोप तय करना—निर्णायक साबित होगा।

