📅 पृष्ठभूमि और उद्देश्य
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले के बाद भारत–پاکستان तनाव बढ़ गया। इस तनावपूर्ण हालात में गृह मंत्रालय और NDMA ने 7 मई 2025 को देश भर में 244 जिलों में नागरिक रक्षा मॉक ड्रिल ‘ऑपरेशन अभ्यास’ का आयोजन किया—जो 1971 के बाद सबसे बड़ा बहु-जिला और बहु-राज्य अभ्यास था। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी का आकलन करना था ।
📣 प्रमुख गतिविधियाँ
- हवा-राज्य सायरन परीक्षण: सुबह 4 बजे शहरों में अलार्म बजाए गए, जैसे दिल्ली (55 स्थानों पर 60 सायरन) और हैदराबाद, पुणे, बेंगलुरु इत्यादि ।
- ब्लैकआउट सिमुलेशन: कई स्थानों जैसे बरेली, दिल्ली, गोरखपुर, पुणे में 10–15 मिनट के लिए बिजली बंद की गई ताकि युद्धकालीन तैयारी परीक्षण हो सके ।
- निकासी व बचाव अभ्यास: कोलकाता, बेंगलुरु और अन्य शहरों में स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मानवीय हड़तालों और निकासी ड्रिल आयोजित हुई ।
🏙️ शहरवार हाइलाइट्स
- दिल्ली: 4 PM पर कई स्थानों पर सायरन और नागरिक निकासी अभ्यास, सरकारी भवन, मॉल व अस्पतालों में तैयारियां ।
- बेंगलुरु: उल्सूर झील के पास नाव बचाव, अग्निशमन व चिकित्सा राहत की डेमोंस्ट्रेशन, शाम में बिजली बंद, 600 से अधिक कर्मी शामिल रहे ।
- लखनऊ: CM योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में एयरपोर्ट और HAL परिसर में ब्लैकआउट व निकासी अभ्यास हुआ ।
- पुणे: काउंसिल हॉल में युद्धकालीन निकासी, आग बुझाने व सहयोगी एजेंसियों के बीच समन्वय की परीक्षण आयोजित ।
- अन्य स्थान: कोलकाता, हैदराबाद, पटना, भोपाल, रांची, भुबनेश्वर समेत अन्य शहरों में भी ड्रिल सफलतापूर्वक संपन्न हुई ।
🧑🤝🧑 सहभागिता और समन्वय
- प्रमुख प्रतिभागी: NCC, NSS, NYKS, होम गार्ड, NDRF, SDRF, पुलिस, फायर ब्रिगेड, मेडिकल स्टाफ और नागरिक स्वयंसेवक शामिल हुए ।
- संवीक्षा व नियंत्रण: राज्य-स्तर के कंट्रोल रूम बनाए गए; जिला स्तर पर राहत शिविर, सामुदायिक रिलीफ सेंटर तथा आपात नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए गए ।
✅ परिणाम और महत्त्व
- प्रभाव: इस अभ्यास से भारत की आपातकालीन तैयारी, नागरिक साक्षरता व प्रशासनिक समन्वय में माने जाने योग्य सुधार हुई।
- संदेश: यह केवल रक्षा तैयारियों की कसौटी नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय एकता और नागरिक जागृति का प्रतीक भी था—‘जन‑जन की सुरक्षा’ की भावना को बढ़ावा मिला ।
🔍 सारांश
ऑपरेशन अभ्यास 2025 ने साबित किया कि भारत न केवल सैन्य बल्कि नागरिक स्तर पर भी युद्ध-स्तरीय तैयारियों को आत्मसात कर सकता है। यह अभ्यास सामरिक उन्नति का संकेत है, जहाँ तकनिकी, सशक्त नागरिक सहभागिता और संस्थागत समन्वय के जरिये राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलती है।

