“ऑपरेशन अभ्यास” – 1971 के बाद सबसे बड़ा नागरिक आपात‑ड्रिल

“ऑपरेशन अभ्यास” – 1971 के बाद सबसे बड़ा नागरिक आपात‑ड्रिल


📅 पृष्ठभूमि और उद्देश्य

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले (जिसमें 26 नागरिक शहीद हुए) के बाद, भारत सरकार ने नागरिक सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए गृह मंत्रालय (MHA) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के नेतृत्व में 7 मई को ऑपरेशन अभ्यास नामक ड्रिल का आयोजन किया। यह 1971 के बाद देश में आयोजित सबसे व्यापक नागरिक आपात‑तैयारी अभ्यास था।

🌐 कवरेज

  • 244 जिलों में चलाया गया।
  • प्रमुख शहरों – दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद – सहित सिंधु सीमा पर बसे जिलों में भी व्यापक रूप से अभ्यास हुआ।

⏰ टाइमलाइन – कैसे हुए अभ्यास?

समयगतिविधि
4:00 PMएयर-रैड सायरन का संचालन, नागरिकों को चेतावनी
4:05–4:30 PMब्लैकआउट अभ्यास, बिजली बंदी व रोशनी कम करना
4:10–5:30 PMइवैक्यूएशन अभ्यास, अस्थायी स्वास्थ्य-शेड का संचालन
प्रारंभ से अंतखोज-विचार, शरण लेने के अभ्यास, अग्निशमन और त्वरित चिकित्सा प्रावधान

🏙️ विभिन्न शहरों में प्रमुख गतिविधियाँ

दिल्ली

  • 11 जिलों में 55 लोकेशनों पर अभ्यास।
  • सायरन बजने पर बंकर व सबवे में शरण लेना, कुछ इलाकों में संक्षिप्त ब्लैकआउट भी हुआ।

मुंबई, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता

  • मुंबई के CSMT स्टेशन, पुणे में परिषद हॉल, हैदराबाद की बाहरी सर्किल, कोलकाता के DRM ग्राउंड पर सर्च-एंड-रस्क्यू व इवैक्यूएशन ड्रिल हुई।

गोवा

  • मिरामार, पनाजी फेरी घाट, गोवा ग्लास फाइबर जैसी लोकेशनों में “पुल-ध्वस्त स्थिति” की खोज-सहायता और नागरिक निकासी परीक्षण हुआ।

अन्य राज्य

  • पंजाब, राजस्थान, J&K, महाराष्ट्र, केरल सहित अन्य 14 राज्यों/संघ-शासित प्रदेशों में स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन, मार्केट आदि स्थानों पर अभ्यास चला।

👥 भागीदार और समन्वय

  • NCC, NSS, NYKS छात्र-स्वयंसेवकों ने अभ्यास में सक्रिय भूमिका निभाई।
  • गृह रक्षक, पुलिस, दमकल, स्वास्थ्य, NDRF/SDRF, स्थानीय प्रशासन ने ऑपरेशन को सुचारु रूप से संचालित किया।

📢 नागरिकों के लिए निर्देश

  • सायरन सुनते ही बिजली बंद करें, मोबाइल एलईडी न जलाएं।
  • शांत तरीके से निकासी में सहयोग करें।
  • अफवाह न फैलाएँ, अधिकारी आदेशों का पालन करें।

✅ निष्कर्ष

“ऑपरेशन अभ्यास” ने साबित किया कि भारत में अब विस्तृत नागरिक आपात-तैयारी का युग शुरू हो चुका है। यह ड्रिल केवल युद्ध की आशंका से नहीं, बल्कि आधुनिक सुरक्षा ढाँचों और नागरिक संजीदगी को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण था। इसके जरिये ये सबक न सिर्फ संजाल और प्रशासन में मूल्यवान सुधार लाये बल्कि जनता को प्रभावी तरीके से तैयारी में शामिल किया गया।