पृष्ठभूमि
3 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में 26 श्रद्धालुओं की मृत्यु के बाद भारत ने 6 मई से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया—एक संयुक्त त्रि-सेवाएँ (थल-सेना, वायुसेना, नौसेना) अभियान, जिसका घोषित लक्ष्य आतंकी ढाँचों को “केंद्रित, संतुलित व गैर-उत्तेजक” ढंग से नष्ट करना था।
टाइमलाइन
| तारीख | प्रमुख कार्रवाई | स्रोत |
|---|---|---|
| 6–7 मई | भारतीय आर्टिलरी व राफ़ाल जेटों ने पीओके के मुज़फ़्फराबाद-कोटली व पाक-पंजाब के बहावलपुर-मियांवाली-लाहौर क्षेत्र में 9 ठिकानों पर SCALP क्रूज़-मिसाइल, HAMMER बम और Excalibur राउंड दागे ; LeT-JeM के लॉजिस्टिक हब तबाह। | |
| 8 मई | पाक सेना की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने “सामयिक प्रतिशोध” की घोषणा की; वायुसेना ने सीमावर्ती भारतीय पोस्टों पर ड्रोन-व मिसाइल दागे, किन्तु कोई बड़ी क्षति नहीं हुई। | |
| 8-9 मई रात | पाकिस्तान ने लगभग 300-400 स्वॉर्म-ड्रोन लहरों में भेजे; भारत के समन्वित एयर-डिफेंस (Akash-Akashteer, L-70, RF-जैमर्स) ने 50 + ड्रोन मार गिराए—शून्य भारतीय हताहत। | |
| 9 मई | नई दिल्ली में पीएम मोदी की समीक्षा बैठक—अगली स्ट्राइक के विकल्प, नागरिक सुरक्षा, और कूटनीतिक संपर्क तय ; पाकिस्तान के चार एयर-डिफेंस रडार/बटालियन मुख्यालयों पर दूसरी लहर की भारतीय मिसाइल-बमबारी। | |
| 10 मई | दोनों देशों ने अमेरिकी-कतर मध्यस्थता से “फ़ुल-सीज़फ़ायर” पर सैद्धांतिक सहमति जतायी, पर रुक-रुक कर गोलाबारी व ड्रोन घुसपैठ जारी रहीं। |
कौन-कौन से हथियार प्रयोग हुए?
- राफ़ाल-SCALP/HAMMER : गहरी पैठ वाले ठिकानों पर सटीक हमला।
- ब्रहमोस-ब्लॉक-III : पहाड़ी इलाक़ों में बंकर-भेदी क्षमता।
- Excalibur 155 mm : आर्टिलरी के लंबी दूरी के सर्जिकल शॉट्स।
- Akashteer नेटवर्क : स्वचालित कमांड-एंड-कंट्रोल, जिसने पाक ड्रोन-स्वॉर्म को रोका।
नुकसान व दावे
| पक्ष | सैन्य/आतंकी हताहत | संरचनात्मक क्षति | दावे-विवाद |
|---|---|---|---|
| भारत | 0 सैनिक (सरकारी आँकड़ा) | एक अग्रिम चौकी को हल्का नुकसान | पाकिस्तान का “5 भारतीय विमान गिराने” का दावा भारतीय रक्षा सचिव ने ख़ारिज किया। |
| पाकिस्तान | 100+ आतंकी, कुछ सैनिक | 9 आतंकी कैंप, 4 AD-रडार, ईंधन-डिपो | पाक ने “31 नागरिक मौत” व भारतीय ड्रोन घुसपैठ का आरोप लगाया; भारत ने “प्रोपगैंडा” कहा। |
सूचना-युद्ध मोर्चा
ऑपरेशन के बाद पाक ISI ने सोशल-मीडिया पर फ़ेक-न्यूज़ अभियान चलाया—भारतीय हताहतों के फ़र्ज़ी वीडियो, पुराने युद्ध चित्र इत्यादि; भारत ने इन्हें चिन्हित कर प्लेटफ़ॉर्म्स से हटवाया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- अमेरिका-क़तर : तुरन्त डी-एस्केलेशन व वार्ता का आग्रह।
- चीन-रूस : संयम, पर “आतंक के ख़िलाफ़ भारत की वैध चिंता” को रेखांकित।
- UNSC ब्रीफिंग : महासचिव ने “परमाणु-जोखिम” की याद दिलायी।
सामरिक विश्लेषण
- मल्टी-डोमेन कॉम्बैट : हवा-ज़मीन-साइबर—तीनों को एकीकृत कर भारत ने डिटेरेंस-बाय-पनिशमेंट सिद्ध किया।
- ड्रोन-रोधी ढाल : Akashteer जैसी स्वदेशी प्रणाली ने कम लागत वाली पाक रणनीति को विफल किया, भविष्य के युद्धों में मानक बनेगी।
- कूटनीतिक संदेश : लक्ष्यों का सीमित चयन, सैन्य ठिकानों से परहेज़—स्पष्ट संकेत कि कार्रवाई आतंक-केंद्रित थी, न कि जनरल-वार।
निष्कर्ष
छह दिनों के भीतर ऑपरेशन सिंदूर ने दर्शाया कि भारत अब त्वरित-प्रतिकार के साथ-साथ ड्रोन व साइबर खतरों के विरुद्ध भी तैयार है। हालांकि 10 मई की कार्यविराम-सहमति से तनाव शांत हुआ, किन्तु सीमा-इलाक़ों में “छाया-युद्ध” (ड्रोन, साइबर व दुष्प्रचार) लंबे समय तक चुनौती बना रहेगा। स्थायी समाधान के लिए आतंक-मुक्त वातावरण और विश्वसनीय संवाद-तंत्र दोनों अनिवार्य हैं।

