जम्मू-कश्मीर के पहलगाम, बिसारन घाटी में हुए जानलेवा आतंकी हमले में 26 नागरिकों की हत्या ने देश को झकझोर कर रख दिया। भारतीय सरकार ने इसे पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठनों—विशेष रूप से The Resistance Front (TRF), जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जाते हैं—द्वारा पीड़ितों को निशाना बनाया गया हमला करार दिया।
🎯 हमला और उसके बाद की घटनाएँ
- हमले की जिम्मेदारी: आरंभ में TRF ने हमले की जिम्मेदारी ली, लेकिन बाद में दावा वापस लिया गया ।
- शुरुआती जांच: सुरक्षा बलों ने स्थानीय पुलिस व आर्मी के साथ मिलकर इलाके की सीलिंग, तलाशी और आतंकियों की गिरफ्तारी शुरू की ।
🧭 भारत की कुटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया
- अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाना
- क्वाड (QUAD) देशों—अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया—ने संयुक्त रूप से हमले की निंदा की और दोषियों को जल्द कार्रवाई की चेतावनी दी ।
- BRICS नौकरशाही ने भी हमले की निंदा की और आतंकवाद के विरुद्ध की गई पहल का समर्थन किया ।
- पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम
- इंडस वाटर ट्रीटी को निलंबित कर दिया गया और दोनों देशों के बीच वीज़ा, हवाई मार्ग, और व्यापार संबंधों में ठहराव आया ।
- पाकिस्तान ने भारतीय ज़मी के ख़िलाफ़ बंदूकबाज़ी शुरू कर दी, जिसका भारत द्वारा जवाबी जवाब भी दिया गया ।
- सैन्य तैयारियाँ
- भारतीय वायु सेना (IAF) ने Aakraman नामक अभ्यास के तहत प्रदर्शन किया ।
- देशव्यापी स्तर पर गृह मंत्रालय-निर्देशित सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल—Operation Abhyaas—07 मई को आयोजित की गयी, जिसमें संकट स्थितियों का प्रशिक्षण दिया गया ।
⚔️ कड़ा सैन्य प्रतिकार: Operation Sindoor
7 मई को Operation Sindoor का आरंभ हुआ — भारत की जवाबी कार्रवाई जिसके तहत पाकिस्तान व PoK के विभिन्न आतंकवादी ठिकानों पर लक्षित मिसाइल और वायु हमले किए गए । पाकिस्तानी पक्ष ने नागरिकों की मौत का दावा किया और भारत की कार्रवाई को ‘आक्रामक बलप्रयोग’ बताया ।
🏘️ घरेलू माहौल में एकजुटता
- सीमा क्षेत्र के गाँवों—विशेष रूप से राजस्थान के बाड़मेर—में नागरिकों ने भारतीय सेना के प्रति पूर्ण समर्थन और कार्रवाई का आह्वान किया ।
- विपक्षी राजनीतिक वाम झंडे के विरोधाभास; पर सरकार की रणनीति को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से उचित बताया गया।
✅ निष्कर्ष
22 अप्रैल को पहलगाम हमला केवल एक आतंकवादी घटना नहीं थी, बल्कि उसके बाद उठाये गए कदमों ने भारत को एक सशक्त कूटनीतिक, सैन्य और नागरिक सुरक्षा वाले मोर्चे पर सक्रिय कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन, घरेलू तैयारियाँ—जैसे मॉक ड्रिल—और जवाबी रणनीतियाँ एक समग्र सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा थीं।
ये घटनाएँ भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति को एक निर्णायक और संगठित स्वरूप देती हैं।

