1️⃣ घटना का क्रम
- 8 मई की देर रात से 9 मई अलसुबह तक पाकिस्तान ने स्वॉर्म-ड्रोन (झुंड-ड्रोन) अभियानों के जरिये जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा (LoC) और पंजाब-राजस्थान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) के 30 से अधिक स्थानों पर घुसपैठ करने की कोशिश की।
- सैन्य सूत्रों के मुताबिक क़रीब 300–400 डी-आई-वाई विस्फोटक-युक्त क्वाडकॉप्टर विमानों की लहरों में भेजे गए, जिनमें से पहली ही लहर में 50 से ज़्यादा ड्रोन भारतीय राडार में पकड़ में आ गए।
2️⃣ भारतीय कार्रवाई
- भारतीय थल-सेना की एयर-डिफेंस रेजिमेंट ने उधमपुर, सांबा, पठानकोट, जम्मू एयरबेस, अखनूर और नागरोटा में तैनात L-70 40 मिमी तोपें, Zu-23-2 गन, शिल्का स्वचालित मंच तथा आकाश और ओसा-AK मिसाइल सिस्टम से ताबड़तोड़ फायर कर सभी जहाज़ों को भेद दिया।
- समन्वित ऑपरेशन में थल-सेना, वायुसेना और बीएसएफ के इंटीग्रेटेड एंटी-ड्रोन नेटवर्क (रडार, RF जैमर, रेड-आइ ट्रैकिंग) को सक्रिय किया गया; एक भी ड्रोन लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका, न कोई सैन्य-नुकसान हुआ।
3️⃣ पाक रणनीति व विफलता
- खुफिया विश्लेषण बताता है कि ड्रोन आधुनिक GPS-नेविगेशन से लैस थे, जिनका लक्ष्य रडार स्टेशन, गोला-बारूद डिपो और हवाईपट्टियाँ था। कुछ पर 40-50 किलो विस्फोटक भी मिला।
- भारतीय स्टेशनरी-जैमर तथा सॉफ्ट-किल तकनीक ने ड्रोन-स्वॉर्म का नियंत्रण बाधित किया; उसके बाद हार्ड-किल हथियारों ने उन्हें मार गिराया। थीम यह थी कि कम लागत में अधिक नुकसान पहुँचाया जाए—मगर भारतीय मल्टी-लेयर्ड एयर-डिफेंस ने योजना ध्वस्त कर दी।
4️⃣ आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ
- संयुक्त प्रेस-वार्ता में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि “संप्रभु वायुसीमा पर किसी भी अतिक्रमण का सख़्त जवाब देना, नई सुरक्षा नीति का आधार है।” वहीं विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को “स्पष्ट युद्धोत्तेजक क़दम” करार देते हुए पाकिस्तान से कड़ा विरोध दर्ज कराया।
- पाकिस्तान ने ड्रोन-हमलों का आरोप नकारते हुए दावा किया कि “भारतीय वायुक्षेत्र में दिखे उपकरण मौसम अध्ययन के गुब्बारे थे।”
5️⃣ अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
- अमेरिका, रूस और चीन ने दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों से संयम बरतने की अपील की। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना दक्षिण-एशिया में ‘ड्रोन-आर्म्स-रेस’ की शुरुआत का संकेत है, क्योंकि दोनों देश अब कम लागत वाले यूएवी प्रणालियों में तेज़ी से निवेश बढ़ा रहे हैं।
6️⃣ भविष्य की चुनौतियाँ
| चुनौती | विवरण |
|---|---|
| टेक-ईवीओल्यूशन | पाकिस्तान-चीन संयुक्त अपग्रेड से ड्रोन अगली बार एंटी-जैमिंग व AI-नेविगेशन से लैस हो सकते हैं। |
| सिविल रक्षा | सीमावर्ती गांवों में बंकर व रिहाइश पुनर्व्यवस्थित करने की आवश्यकता; ड्रोन-अलर्ट ऐप का दायरा बढ़ाना। |
| डिप्लोमेटिक बैक-चैनल | सीज़फ़ायर को लागू रखने और हॉट-लाइन सक्रिय रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता महत्वपूर्ण। |
निष्कर्ष
8-9 मई 2025 की रात भारतीय एयर-डिफेंस ने दिखाई तकनीकी बढ़त, त्वरित समन्वय और शून्य-क्षति का आदर्श—जिसने न केवल पाकिस्तानी रणनीति को विफल किया बल्कि क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन में यूएवी-युग के नए नियम भी रेखांकित कर दिए। आने वाले दिनों में ड्रोन-विरोधी ढाल और राजनयिक पहलों—दोनों को मज़बूत करना ही इस तनाव-चक्र से बाहर निकलने का रास्ता होगा।

