📌 मिशन का उद्देश्य और उपग्रह
- रॉकेट: PSLV‑C61 (PSLV‑XL कॉन्फ़िगरेशन का 27वां, कुल 63वां उड़ान)
- उपग्रह: EOS‑09 (RISAT‑1B), लगभग 1,696 किग्रा, C-बैंड SAR तकनीक से लैस; 5 वर्षीय मिशन और निगरानी, कृषि, आपदा प्रबंधन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के अहम स्तरों पर काम करता
⚠️ क्या हुआ लॉन्च के दौरान?
| चरण | स्थिति |
|---|---|
| पहला + दूसरा | ज्वलन सफल और कक्षा में प्रवेश सही रहा |
| तीसरा चरण (PS3) | 114 सेकंड की बर्न अवधि में ~203 सेकंड के समय अचानक चैंबर दबाव गिरा और फ्लेक्स–नोज़ल नियंत्रण प्रणाली में गड़बड़ी आई, जिससे रॉकेट ट्रैजेक्टरी से हट गया |
| परिणाम | EOS‑09 उपग्रह निर्धारित 524 किलोमीटर की सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित नहीं हो पाया; मिशन असफल रहा |
🔍 विफलता के बाद की कार्रवाई
- ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी स्वीकार की, बोले “mis-sensing of chamber pressure… mission could not be accomplished”
- एक राष्ट्रीय फेल्योर एनालिसिस कमेटी (NFAC) गठित की गई, जिसमें IISc और IIT जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं; रिपोर्ट की डेडलाइन मध्य जून
- PSLV की योजनाबद्ध उड़ानें अस्थायी तौर पर टाल दी गई हैं; अगली उड़ान उसी के बाद पुनःशुरू होगी
🧠 PSLV की जागरूकता – क्या भरोसा डगमगा?
- PSLV की 101वीं उड़ान में यह तीसरा व्यापक असफल मामला है—पहला 1993 में और दूसरा 2017 में—करीब 60 लगातार सफलताओं के बाद यह असफलता देखी गई
- विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कॉम्पैक्ट और तकनीकि त्रुटि थी, और PSLV का विश्वसनीय मॉडल प्रभावित नहीं हुआ; ISRO का रिएक्शन काफी तेज रहा
📝 निष्कर्ष और आगे की राह
- तकनीकी सीख: PS3 के फ्लेक्स-नोज़ल और ठोस-ईंधन मोटर की कार्यप्रणाली की गहराई से समीक्षा आवश्यक
- तुरंत सुधार: त्रुटि विश्लेषण आगामी की उड़ानों के लिए दिशा-निर्देश तय करेगा
- भरोसे की रक्षा: PSLV की प्रतिष्ठा इससे प्रभावित नहीं होगी; अगली योजनाबद्ध उड़ानें इसी तर्ज पर होंगी

