छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जीत की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। इस 30-दिनीय सैन्य कार्रवाई में 31 माओवादी मारे गए, दर्जनों घायल हुए, और कई को गिरफ्तार भी किया गया।
ऑपरेशन की शुरुआत और रणनीति:
ऑपरेशन की शुरुआत 21 अप्रैल 2025 को की गई थी। यह माओवादी गतिविधियों के गढ़ अबुज्जमार, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के जंगलों में एक समन्वित कार्रवाई थी। अभियान में CRPF, DRG (District Reserve Guard), STF (Special Task Force) और स्थानीय पुलिस की टुकड़ियां शामिल थीं।
विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों को हेलीकॉप्टर से जंगलों के भीतर उतारा गया और थल, वायु और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के ज़रिए माओवादियों को चिन्हित किया गया।
मुख्य घटनाएं:
- अबुज्जमार (21 मई): सबसे बड़ी मुठभेड़, जिसमें 27 माओवादी मारे गए (इसकी अलग रिपोर्ट पहले प्रकाशित)
- बीजापुर (2 मई): 4 माओवादी ढेर, भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद
- सुकमा (10-14 मई): 6 गिरफ्तार, एक कैंप ध्वस्त किया गया
- नारायणपुर (समाप्ति चरण): कई आत्मसमर्पण की पुष्टि, जिनमें दो वांछित महिला कमांडर भी शामिल
बरामद हथियार और सामग्री:
- 25 से अधिक आधुनिक हथियार (INSAS, AK-47)
- 300+ जिंदा कारतूस
- 15 IED बम
- वायरलेस सेट, नक्सली वर्दी, माओवादियों का प्रोपेगैंडा साहित्य
- 1 लाख रुपये नकद और राशन सामग्री
सरकार की प्रतिक्रिया:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा:
“ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की सफलता हमारे बहादुर जवानों की प्रतिबद्धता और समर्पण का प्रमाण है। हम माओवाद के समूल नाश के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
केंद्रीय गृहमंत्री ने इस ऑपरेशन को “देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए मील का पत्थर” करार दिया।
स्थानीय लोगों को राहत:
ऑपरेशन के दौरान प्रशासन ने गांवों में राशन, स्वास्थ्य जांच और मोबाइल क्लीनिक की व्यवस्था की। माओवादियों की मौजूदगी से भयभीत ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और कई ने सुरक्षा बलों को सहयोग भी किया।
विश्लेषण:
विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऑपरेशन 2010 के दंतेवाड़ा हमले के बाद सबसे बड़ा प्रतिकारात्मक अभियान था। यह रणनीतिक सफलता माओवाद के खात्मे की दिशा में बेहद निर्णायक मानी जा रही है।
📝 निष्कर्ष:
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट ने न केवल जंगलों में छिपे माओवादियों को भारी नुकसान पहुंचाया, बल्कि यह दिखा दिया कि आधुनिक रणनीति, तकनीक और समन्वय के ज़रिए आतंक और उग्रवाद से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। इस अभियान के पूरे प्रभाव का आकलन आने वाले हफ्तों में किया जाएगा, पर अभी तक के परिणाम बेहद उत्साहवर्धक हैं।

