नई दिल्ली: 29 जनवरी को चांदी की कीमतों ने इतिहास रच दिया। घरेलू बाजार में चांदी पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गई। वैश्विक बाजारों में बढ़ी अस्थिरता, कमजोर डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग ने चांदी की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।बाजार जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर दिखा। औद्योगिक मांग में मजबूती और सीमित आपूर्ति ने भी तेजी को समर्थन दिया।भारत में ज्वैलरी सेक्टर और औद्योगिक उपयोग के लिए बढ़ी मांग के चलते चांदी की कीमतों में उछाल देखा गया। वायदा बाजार में भी कारोबार का वॉल्यूम बढ़ा, जिससे तेजी और मजबूत हुई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।विश्लेषकों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की बढ़ती खपत के चलते लंबी अवधि में इसका आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। फिर भी निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। चांदी की रिकॉर्ड तेजी निवेशकों के लिए अहम संकेत है, लेकिन अस्थिर बाजार में जल्दबाजी से बचना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: 29 जनवरी को चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलो क्यों पहुंची?
उत्तर: वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह रही।
प्रश्न 2: क्या चांदी की कीमतों में आगे भी तेजी बनी रह सकती है?
उत्तर: लंबी अवधि में संभावनाएं अच्छी हैं, लेकिन अल्पकाल में उतार-चढ़ाव संभव है।
प्रश्न 3: क्या अभी चांदी में निवेश करना सही है?
उत्तर: विशेषज्ञ चरणबद्ध और सोच-समझकर निवेश की सलाह देते हैं।

