१. नौ देशों के विदेश मंत्रियों के साथ फोन वार्ता
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल) के बाद प्रभावित देशों के साथ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए कूटनीतिक संवाद को और तेज किया। उन्होंने निम्नलिखित देशों के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत की और आतंकवाद विरोधी एक साझा प्रतिबद्धता जताई:
- संयुक्त राष्ट्र – यूएन महासचिव गुटेरेस द्वारा प्रचंड निंदा प्राप्त
- संयुक्त राज्य अमेरिका – सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मारको रुबियो ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता पर बल दिया
- यूएई, यूनाइटेड किंगडम, सियरा लियोन, अल्जीरिया, गुयाना, स्लोवेन, पैनामा, साइप्रस – सभी ने हमले की स्पष्ट निंदा की और भारत के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
जयशंकर ने इन वार्ताओं में कहा:
“भारत दृढ़ संकल्पित है कि इस हमले की **परियोजना, योजनाकार और सहआयोजक सुरक्षित रूप से जिम्मेदार ठहराए जाएं।”apnews.com+1newsonair.gov.in+1
२. यूएन महासचिव की निंदा और चिंता
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 29 अप्रैल को भारत और पाकिस्तान दोनों नेताओं से बात की और हमले को “अनुचित” बताया। उन्होंने:
- आतंकवाद की किसी भी रूप में कड़ी निंदा की
- प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की
- क्षेत्रीय तनाव को बढ़ने से रोकने और शांति बनाए रखने पर ज़ोर दिया
- अपने “Good Offices” की पेशकश की ताकि द्विपक्षीय तनाव शांत हो सके
इस वार्ता थी कि वैश्विक मंच पर भी कूटनीतिक दबाव बना।
३. अंतरराष्ट्रीय मंज़र और कूटनीतिक हलचल
- यूएस सेक्रेटरी रुबियो ने भारत-पाक तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की और भारत के साथ आतंक के खिलाफ सहयोग जारी रखने का भरोसा जताया।
- पाकिस्तान की ओर से आरोपों का खंडन, जांच की मांग, और तनाव में कमी के लिए कूटनीतिक पहल शुरू हुई।
४. जयशंकर की अंतरराष्ट्रीय रणनीति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की वैश्विक पहल में कई खास बिंदु थे:
- निर्दिष्ट देशों से “zero tolerance for terrorism” पर सहमति संपन्न
- यूएन से संयम और कूटनीतिक समाधान की अपील
- संयुक्त राष्ट्र में समर्थन और क्षेत्रीय आवाज को मजबूत करना
- भारत की सुरक्षा नीतियों को एक वैश्विक कूटनीतिक संदर्भ में स्थिति देना
इस रणनीति के माध्यम से भारत ने आतंकवाद को एक अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में उठाया।
🧭 निष्कर्ष
30 अप्रैल को जयशंकर के नेतृत्व में कूटनीतिक जोड़-तोड़ ने यह दर्शाया कि भारत आतंक बिरोधी मोर्चे को सिर्फ सैन्य या राजनीतिक मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि कट्टर वैश्विक चुनौतियों वाले मंच पर ले जा रहा है।
- दुनियाभर के देशों से आश्वासन मिला
- यूएन की निंदा के साथ थर्ड पार्टी निबंधन संभव नजर आता है
- भारत की कूटनीकी सक्रियता ने उसे अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा माहौल में एक समान नागरिक व सहयोगी के रूप में मजबूती दी
इस कूटनीतिक पहल से भारत ने स्पष्ट संकेत जारी किया कि आतंक व सीमा सुरक्षा का मुद्दा अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक शांति-संरक्षण संबंधी है।

