“भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को यह उपलब्धि हासिल हुई है कि यह भारत का पहला शहर बन गया है, जहां रेलवे ट्रैक के बीच पोर्टेबल सोलर पैनल लगाए गए हैं।”
नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की ओर कदम भारतीय रेलवे ने 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में रेलवे तेजी से सौर ऊर्जा को अपना रहा है। वाराणसी में शुरू की गई यह पहल रेलवे के हरित और सतत परिवहन नेटवर्क की रणनीति का हिस्सा है।
सोलर पैनल से होने वाले फायदे विशेषज्ञों के अनुसार, इन वाराणसी पोर्टेबल सोलर पैनल से रेलवे की बिजली जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।
- डीज़ल और कोयले पर निर्भरता घटेगी।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- स्थानीय स्तर पर ऊर्जा की खपत घटेगी।
- बिजली खर्च में भी बचत होगी।
रेलवे अधिकारियों का बयान रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पोर्टेबल सोलर पैनल आसानी से एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किए जा सकते हैं। इससे रेलवे को जरूरत के अनुसार ऊर्जा उत्पादन का बेहतर विकल्प मिलेगा। यह मॉडल भविष्य में अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है।
ग्रीन एनर्जी की ओर तेज़ी से बढ़ता रेलवे भारतीय रेलवे पहले से ही ट्रेनों और स्टेशनों पर सोलर पैनल लगाने की दिशा में काम कर रहा है। अब वाराणसी पोर्टेबल सोलर पैनल प्रोजेक्ट ने इसे और खास बना दिया है। यह कदम भारत को सतत विकास के वैश्विक लक्ष्य के करीब ले जाएगा।
वाराणसी की विशेष उपलब्धि वाराणसी न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अब यह ग्रीन एनर्जी इनोवेशन का केंद्र भी बन गया है। यहां की इस पहल ने अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल कायम की है।

