हाल के वर्षों में अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के लिए नौकरी पाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। विशेषकर आईटी क्षेत्र में, जहां भारतीयों की बड़ी संख्या कार्यरत है, स्थिति चिंताजनक है।
एच-1बी वीजा स्पॉन्सरशिप में कमी:
अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनियों ने एच-1बी वीजा स्पॉन्सरशिप में कमी की है। यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024 में गूगल, अमेज़न, इंफोसिस और आईबीएम जैसी कंपनियों ने पहले की तुलना में कम एच-1बी वीजा स्पॉन्सर किए हैं। उदाहरण के लिए, अमेज़न कॉम सर्विसेज LLC ने 9,265, इंफोसिस लिमिटेड ने 8,140, और गूगल LLC ने 5,364 वीजा अप्रूवल किए हैं।
छंटनी और बेरोजगारी:
पिछले कुछ महीनों में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न जैसी कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी हुई है, जिससे हजारों भारतीय आईटी पेशेवर बेरोजगार हो गए हैं। इनमें से कई एच-1बी वीजा धारक हैं, जिन्हें नई नौकरी खोजने के लिए 60 दिनों का समय मिलता है। इस अवधि में नई नौकरी न मिलने पर उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।
भारतीय कंपनियों की स्थिति:
भारतीय आईटी कंपनियों ने भी एच-1बी वीजा स्पॉन्सरशिप में कमी की है। 2016 से अमेरिकी कंपनियों ने एच-1बी वीजा का उपयोग 189% तक बढ़ाया है, जबकि टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस और एचसीएल जैसी भारतीय कंपनियों ने इसका उपयोग 56% तक कम किया है।
छात्रों की चुनौतियाँ:
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए भी नौकरी पाना कठिन हो गया है। कई छात्र एमएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी नहीं पा रहे हैं और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कुछ छात्र अपने खर्चों को पूरा करने के लिए पार्ट-टाइम नौकरियों का सहारा ले रहे हैं।
निष्कर्ष:
अमेरिका में भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए नौकरी पाना वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है। एच-1बी वीजा स्पॉन्सरशिप में कमी, छंटनी और बेरोजगारी की बढ़ती दर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसलिए, अमेरिका में नौकरी की तलाश करने वाले भारतीयों को वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाएँ बनानी चाहिए।

