आंध्र प्रदेश में शराब नीति और वितरण प्रणाली से जुड़े ₹3,200–₹3,500 करोड़ के घोटाले में बड़े पैमाने पर सोने में रिश्वत मिलने की जानकारी सामने आई है। यह घोटाला अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है और जांच इसमें नेताओं और नौकरशाहों तक पहुंच चुकी है।
🔍 जांच का पथ और सिलसिला:
- CID और SIT की संयुक्त टीम ने हालिया चार्जशीट में पाया कि जून 2019 से मई 2024 तक प्रति माह ₹50–60 करोड़ का रिश्वत का नेटवर्क चलता था, जिसमें नकद और सोने दोनों तरीकों से भुगतान होता था ।
- Investigators का दावा है कि कई बार भुगतान सोने की गोल्ड बुलियन (स्वर्ण मुद्राओं/छड़ियों) में हुआ ।
🏛️ मुख्य आरोपियों की सूची:
- पी.वी. मिधुन रेड्डी (YSRCP सांसद) – उनके खिलाफ ₹3,200 करोड़ से जुड़े भ्रष्टाचार और नीतिगत हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है। उन्हें हाल ही में न्यायिक हिरासत भेजा गया है ।
- केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी – मिडलमैन बताए जा रहे हैं, जिन्होंने प्राथमिक रूप से रिश्वत धोखाधड़ी की रफ्तार संभाली होती है ।
- विजयसाई रेड्डी और अन्य नेता – आरोप है कि इन्होंने नीतिगत बदलावों को उचित distilleries की सहायता के लिए प्रभावित किया ।
- पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी – चार्जशीट में नाम आते हैं कि उन्होंने भी Kickback लापरवाही से स्वीकार किया, हालांकि अभी तक फॉर्मली आरोपी नहीं ।
⚙️ कैसे हुआ घोटाला?
- नकद + सोने की भुगतान प्रणाली: शराब आपूर्तिकर्ताओं द्वारा नकद के साथ सोने में रिश्वत दी गयी, जिसका उपयोग राजनीतिक एवं संपत्ति खरीद में हुआ ।
- नीतिगत हस्तक्षेप: सरकारी सिस्टम को कस्टमाइज़ कर नेटफिट डिस्टिलरीज को लाभ पहुंचाया गया—जैसे कि ऑटोमेटेड OFS से हटकर मैनुअल प्रक्रिया अपनाई गयी, जिससे पक्षपात संभव हुआ
- शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग: खबरे हैं कि ₹250–₹300 करोड़ का पैसों को शेल कंपनियों और हवालों के जरिये विदेशों (दुबई, अफ्रीका आदि) में निवेश किया गया
🛑 सरकार की कार्रवाई:
- ACB और CID ने जांच तेज़ कर दी है, कई अधिकारियों और distillery मालिकों पर आरोप तय किए जा रहे हैं।
- आंध्र प्रदेश सरकार ने अभियुक्तों के ₹33 करोड़ से ज्यादा संपत्ति अटैच कर दी है ।
- सांसद पी.वी. मिधुन रेड्डी को 1 अगस्त तक की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और उनके खिलाफ कई धाराएं (करप्शन, धोखाधड़ी, षड्यंत्र) लगाई गईं ।
🎭 राजनीतिक जुड़ाव और प्रतिक्रियाएँ:
- YSRCP ने आरोप लगाए कि यह मामला राजनीतिक बदले की रणनीति है, जिसमें नेताओं को फंसाने हेतु बयान दबाव या उत्पीड़न के ज़रिए लिया गया ।
- तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सरकार ने इसे आंतरिक सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ठोस कदम करार दिया।
- Spotlight यह है कि, इस घोटाले में नकद और सोने की पेमेंट सिस्टम की थीम इसका सबसे चौंकाने वाला पहलू है।
✅ निष्कर्ष:
आंध्र प्रदेश में यह ₹3–3.5 हजार करोड़ का शराब घोटाला अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है और सोने में रिश्वत की अविश्वसनीय बात अब तक की जांचों की सबसे संवेदनशील जानकारी रही है। इस पूरे मामले की जटिलता, राजनीतिक भूमिका और संपत्ति-संबंधित खुलासे इसकी गंभीरता को दर्शाते हैं।

