बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद देश में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। चिन्मय दास, जो इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) से जुड़े हैं, को 25 नवंबर 2024 को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर में चटगांव में एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया था, जिसके चलते उन पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गिरफ्तारी के बाद, चटगांव में उनकी जमानत याचिका खारिज होने पर उनके समर्थकों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसमें एक वकील, सैफुल इस्लाम आलिफ, की हत्या हो गई। इस घटना के बाद चटगांव में तीन हिंदू मंदिरों—लोकनाथ मंदिर, मानसा माता मंदिर, और काली माता मंदिर—पर हमले हुए।
भारत सरकार ने चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त की है और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इसके जवाब में, बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन को एक “धार्मिक कट्टरपंथी संगठन” करार देते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
इस बीच, बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें मंदिरों में तोड़फोड़ और हिंदू व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमले शामिल हैं। चटगांव में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि चिन्मय दास की जल्द से जल्द रिहाई सुनिश्चित की जा सके।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने वकील की हत्या की निंदा की है और मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को एक बार फिर से उजागर किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

