छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शुरू हुआ दुर्ग काउंसलिंग फर्स्ट मॉडल आज पारिवारिक विवादों के समाधान का एक सफल उदाहरण बन चुका है। इस पहल का उद्देश्य छोटे-छोटे पारिवारिक झगड़ों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाना है, ताकि मामले कोर्ट या पुलिस तक न पहुंचें।पहले जहां परिवारों में विवाद बढ़ते-बढ़ते गंभीर हो जाते थे, वहीं अब इस मॉडल के जरिए संवाद और समझदारी से समाधान निकाला जा रहा है। सेक्टर-6 स्थित परिवार परामर्श केंद्र में महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों सभी की समस्याओं को समान रूप से सुना जाता है।
यही वजह है कि दुर्ग काउंसलिंग फर्स्ट मॉडल को जेंडर-बैलेंस्ड सिस्टम माना जा रहा है।इस व्यवस्था में पुरुष काउंसलर की नियुक्ति भी की गई है, जिससे पुरुषों की समस्याओं को भी गंभीरता से समझा जा सके। साथ ही, सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच के जरिए बुजुर्गों को भी सुरक्षा और सम्मान मिल रहा है।अब तक करीब 200 मामलों में से 130 का समाधान हो चुका है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि दुर्ग काउंसलिंग फर्स्ट मॉडल कितना प्रभावी साबित हो रहा है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. दुर्ग काउंसलिंग फर्स्ट मॉडल क्या है?
यह पारिवारिक विवादों को काउंसलिंग के जरिए सुलझाने की एक पहल है।
Q2. इसमें कौन लाभ उठा सकता है?
महिला, पुरुष और बुजुर्ग सभी इस सेवा का लाभ ले सकते हैं।
Q3. यह मॉडल क्यों खास है?
क्योंकि यह जेंडर-बैलेंस्ड और संवाद आधारित समाधान देता है।

