चक्रवात Bijapur में नक्सलियों के साथ मुठभेड़

चक्रवात Bijapur में नक्सलियों के साथ मुठभेड़


छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा हिल्स (Chhattisgarh–Telangana सीमा पर) में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच एक भयंकर मुठभेड़ हुई। ये मुठभेड़ एक बड़े पैमाने पर चल रहे अभियान — ऑपरेशन संकल्प (Operation Sankalp) — का हिस्सा थी, जिसमें करीब 24–28 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात थे ।


🗓️ घटनाक्रम और अभियानों की पृष्ठभूमि

  • ऑपरेशन संकल्प 21 अप्रैल 2025 को शुरू हुआ।
  • इस अभियान का उद्देश्य माओवादी नक्सलियों के बटालियन नं. 1, DKSZC और तेलंगाना राज्य समिति के वरिष्ठ कैडरों को निशाना बनाना था ।
  • 24 अप्रैल को तीन महिला नक्सलियों के मारे जाने सहित कई बड़े सुरंग भंडार, हथियार और विस्फोटक जब्त किए गए ।

⚔️ 7 मई का दिन – मुठभेड़ के झलक

  • सुबह कर्रेगुट्टा हिल्स के जंगलों में संघर्ष शुरू हुआ, जो हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से परिचालित था ।
  • सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कई ठिकानों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें वे घिरे रहे ।

💥 निष्कर्ष — हताहतों का हिसाब

  • रिपोर्ट्स में 15 से 22 नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी मिलती है:
    • “More than 15 Naxals were killed…” कहा गया ।
    • तो कुछ संसाधनों के अनुसार संख्या 22 रही ।
  • इस लड़ाई में एक शीर्ष नक्सली महिला भी मारी गई, हथियार के साथ शव बरामद किए गए ।

🧨 संपत्ति जब्ती और संचालन

  • 200+ IED (विस्फोटक सुरंग) जब्त और नष्ट किये गए ।
  • नक्सली ठिकानों में छापा मारकर हथियार, विस्फोटक, राशन और दवाइयाँ बरामद की गयीं ।
  • कोबरा, CRPF, STF, DRG, बस्तर फाइटर्स सहित लगभग 24–28 हजार जवानों ने अभियान में भाग लिया ।

🎖️ प्रतिक्रिया और संदेश

  • मुख्यमंत्री विश्णुदेव साय ने कहा कि 22 से अधिक नक्सलियों के शव बरामद हुए, यह एक “बड़ी सफलता” है ।
  • हालांकि उप-मुख्यमंत्री ने ‘ऑपरेशन संकल्प’ नाम की आधिकारिक पुष्टि पर सवाल उठाया, लेकिन अभियान जारी है ।
  • गृह मंत्री अमित शाह, इंडियन एक्सप्रेस और अन्य सुरक्षा अधिकारियों ने इस अभियान की सराहना की और इसे ऐतिहासिक बताया ।

🧭 निष्कर्ष

ऑपरेशन संकल्प के इस चरण ने दिखाया कि नक्सली गढ़ों के खिलाफ भारत की नीति अब सशक्त, संरचित और निर्णायक हो चुकी है। लगभग 3 हफ्ते एवं हजारों जवानों की परिचालन तैयारी का नतीजा—200+ IED नष्ट, हथियार जब्त, दर्जनों नक्सलियों का मारा जाना—स्थानीय निवासियों को राहत और शासन-व्यवस्था पर विश्वास प्रदान करता है।