एक आधुनिक पासपोर्ट सेवा केंद्र का दृश्य, जहां नागरिक डिजिटल कियोस्क पर आवेदन कर रहे हैं। पृष्ठभूमि में ई-पासपोर्ट का प्रतीक, भारत का मानचित्र और पुलिस वेरिफिकेशन को दर्शाने वाले ग्राफिक्स दिखाई दे रहे हैं।
पासपोर्ट सेवा सुधार के तहत डिजिटल प्रक्रिया से नागरिकों को मिल रही तेज और पारदर्शी सेवाएं।

पासपोर्ट सेवा सुधार | डिजिटल बदलाव से बढ़ा भरोसा, पुलिस वेरिफिकेशन में पारदर्शिता की मांग


पासपोर्ट सेवा सुधार के तहत देश में पासपोर्ट प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, डिजिटल और नागरिक केंद्रित बनती जा रही है। सरकार ने ई-पासपोर्ट, पासपोर्ट सर्विस प्रोग्राम 2.0 और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया है, जिससे आवेदन और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया काफी आसान हुई है। हालांकि, पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान रिश्वतखोरी की शिकायतें अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में 269 जिलों के 33,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक सर्वे के अनुसार, 81% नागरिकों ने पासपोर्ट सेवा केंद्रों के अनुभव को अच्छा बताया।

वहीं 58% लोगों ने स्वीकार किया कि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान रिश्वत या उपहार देने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। इससे साफ है कि पासपोर्ट सेवा सुधार का असर सेवा केंद्रों पर दिख रहा है, लेकिन पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में अभी और सुधार की आवश्यकता है। 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट शुल्क में भी बदलाव होने जा रहा है। ऐसे में नागरिक चाहते हैं कि बढ़ी हुई फीस के साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, डिजिटल और भ्रष्टाचार मुक्त बने। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुलिस वेरिफिकेशन को भी फेसलेस और ऐप आधारित किया जाए, तो रिश्वतखोरी की शिकायतों में बड़ी कमी आ सकती है। पासपोर्ट सेवा सुधार केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि नागरिकों के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

FAQ

प्रश्न 1: पासपोर्ट सेवा सुधार क्या है?
उत्तर: यह पासपोर्ट सेवाओं को डिजिटल, तेज और पारदर्शी बनाने की सरकारी पहल है।

प्रश्न 2: नागरिक किस सुधार की सबसे अधिक मांग कर रहे हैं?
उत्तर: डिजिटल और फेसलेस पुलिस वेरिफिकेशन प्रणाली लागू करने की।

Prem Chand | Akhbaar Ekta