बैसाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारनाथ अस्थि दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु वाराणसी के सारनाथ पहुंचे। मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन सुबह 6:30 बजे से शुरू हुए और करीब पांच घंटे तक जारी रहे। इस खास मौके पर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और पंचशील झंडों से सजाया गया।मंदिर प्रशासन ने सारनाथ अस्थि दर्शन के लिए विशेष तैयारी की थी।
सुबह चार बजे बौद्ध भिक्षुओं ने पूजा-अर्चना की और अस्थि अवशेष को बुद्ध प्रतिमा के सामने स्थापित किया। इसके बाद श्रद्धालुओं को क्रमबद्ध तरीके से दर्शन की अनुमति दी गई।इस आयोजन में थाईलैंड और वियतनाम समेत कई देशों से अनुयायी पहुंचे। भारत के विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग आए। हर श्रद्धालु के लिए सारनाथ अस्थि दर्शन एक आध्यात्मिक अनुभव बन गया।भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। बैरिकेडिंग और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई, जिससे व्यवस्था बनी रही। बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान साधना का भी आयोजन हुआ, जिससे वातावरण और अधिक शांतिपूर्ण बन गया।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. सारनाथ अस्थि दर्शन कब होता है?
बैसाख पूर्णिमा के अवसर पर विशेष रूप से सारनाथ अस्थि दर्शन आयोजित किया जाता है।
Q2. दर्शन का समय क्या होता है?
दर्शन सुबह 6:30 बजे से शुरू होकर लगभग पांच घंटे तक चलता है।
Q3. सारनाथ अस्थि दर्शन का महत्व क्या है?
यह भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का दर्शन है, जिसे बेहद पवित्र और आध्यात्मिक माना जाता है।

