नेपाल में शिक्षा सुधार के विरोध में शिक्षक आंदोलन: काठमांडू में हिंसक झड़प, 27 घायल

नेपाल में शिक्षा सुधार के विरोध में शिक्षक आंदोलन: काठमांडू में हिंसक झड़प, 27 घायल


पाल की राजधानी काठमांडू में रविवार को शिक्षा विधेयक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों और पुलिस के बीच हुई झड़प ने उग्र रूप ले लिया। इस झड़प में 27 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई शिक्षक, प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह आंदोलन नेपाल सरकार द्वारा प्रस्तावित नए शिक्षा विधेयक के विरोध में चल रहा है। इस विधेयक के तहत निजीकरण को बढ़ावा देने, शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव, अनुशासनात्मक अधिकारों का हस्तांतरण और शिक्षण संस्थानों के प्रशासनिक अधिकारों में कटौती की योजना है।
शिक्षकों का आरोप है कि यह विधेयक सरकारी स्कूलों के अधिकारों को कमजोर करता है और शिक्षकों की स्वायत्तता को प्रभावित करता है। आंदोलन का नेतृत्व नेपाल शिक्षक महासंघ (NTF) कर रहा है।

अप्रैल भर हड़ताल

अप्रैल महीने की शुरुआत से ही पूरे नेपाल के सरकारी स्कूलों में कामकाज ठप पड़ा है। हजारों शिक्षक हड़ताल पर हैं, जिससे लाखों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में परीक्षाएं तक स्थगित करनी पड़ी हैं। सरकार द्वारा कई दौर की वार्ताएं बुलाई गईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

27 अप्रैल को टकराव

रविवार को हजारों शिक्षक राजधानी काठमांडू में एकत्र हुए और संसद भवन की ओर मार्च किया। पुलिस ने जब उन्हें आगे बढ़ने से रोका तो स्थिति बिगड़ गई। पुलिस द्वारा आंसू गैस और लाठीचार्ज का प्रयोग किया गया, वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया।
इस टकराव में कुल 27 लोग घायल हुए, जिनमें से 8 को गंभीर चोटें आईं और उन्हें त्रिवुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

सरकार और शिक्षक महासंघ की प्रतिक्रियाएं

शिक्षा मंत्री दीपक बहादुर कार्की ने कहा, “सरकार सभी पक्षों से संवाद के लिए तैयार है, लेकिन कानून व्यवस्था को भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
वहीं, नेपाल शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष शंकर गौतम ने आरोप लगाया कि सरकार मुद्दों को हल करने की बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।

आगे की राह

अब यह आंदोलन केवल शिक्षा क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर सरकार की नीति और दमन के खिलाफ एक बड़ा जनांदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है। शिक्षकों ने ऐलान किया है कि जब तक विधेयक को वापस नहीं लिया जाता, वे संघर्ष जारी रखेंगे।


निष्कर्ष
नेपाल में शिक्षा सुधार के नाम पर लाया गया विधेयक अब देशव्यापी असंतोष का कारण बन गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है और क्या कोई व्यावहारिक समाधान निकाल पाती है जिससे शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट सके।