केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस विधेयक पर अब तक 97 लाख से अधिक याचिकाएं प्राप्त हो चुकी हैं और 284 प्रतिनिधिमंडल ने समिति के सामने अपने सुझाव दिए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रीजीजू ने कहा कि, इतिहास में पहली बार किसी विधेयक पर इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं मिली हैं। सभी सुझावों पर सरकार ने गंभीरता से विचार किया है और मुझे उम्मीद है कि जिन लोगों ने इसका विरोध किया था, वे अब इसका समर्थन करेंगे।
विधेयक पेश करते हुए किरेन रीजीजू ने वर्ष 2013 में यूपीए सरकार द्वारा किए गए वक्फ बोर्ड से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया, जिनके तहत वक्फ बोर्ड के आदेश को सिविल अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। उन्होने कहा कि, अगर यूपीए सरकार सत्ता में होती, तो संसद भवन और एयरपोर्ट जैसी प्रमुख इमारतों को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता।
उन्होंने यह भी बताया कि 1995 में वक्फ ट्रिब्यूनल की स्थापना की गई थी, जिससे वक्फ बोर्ड के फैसलों को चुनौती दी जा सकती थी। इसके अलावा, यदि किसी वक्फ संपत्ति से 5 लाख रुपये से अधिक की आय होती, तो सरकार ने उसकी निगरानी के लिए कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान किया था। यह व्यवस्था भी 1995 में ही शुरू की गई थी। आज यह मुद्दा इतना तूल क्यों पकड़ रहा है?
वहीं, कांग्रेस ने विधेयक के खिलाफ आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष को विधेयक की प्रति देर से दी गई, जिससे इसे ठीक से समीक्षा करने का समय नहीं मिला। कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई ने कहा कि जेपीसी ने विधेयक पर पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया और यह विधेयक राष्ट्रीय सद्भाव को बाधित करने वाला है।