पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन से इस्तांबुल स्थित डोलमाबाहचे वर्किंग ऑफिस में मुलाकात की। यह बैठक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने, और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुलाकात के मुख्य बिंदु
- द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तान-तुर्की उच्चस्तरीय रणनीतिक सहयोग परिषद की पिछली बैठक की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की।
- व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा: दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया और ऊर्जा, परिवहन, और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
- आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयास: दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को बढ़ाने, खुफिया जानकारी साझा करने, और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
- रेल संपर्क में सुधार: राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस्तांबुल-तेहरान-इस्लामाबाद रेल लाइन की प्रभावशीलता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
- शिक्षा क्षेत्र में सहयोग: शिक्षा क्षेत्र में ठोस सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा गया।
भारत के खिलाफ समर्थन के लिए धन्यवाद
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत के साथ हालिया तनाव के दौरान पाकिस्तान को समर्थन देने के लिए राष्ट्रपति एर्दोगन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “आज शाम इस्तांबुल में अपने प्रिय भाई राष्ट्रपति एर्दोगन से मिलने का सम्मान प्राप्त हुआ। भारत-पाकिस्तान के हालिया तनाव में पाकिस्तान के प्रति उनके अडिग समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।”
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, विशेष रूप से कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद। तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के पक्ष में बयान दिए हैं, जिससे भारत और तुर्की के रिश्तों में खटास आई है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तुर्की यात्रा और राष्ट्रपति एर्दोगन से मुलाकात पाकिस्तान और तुर्की के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच सहयोग, विश्वास, और साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

